Thursday, 31 May 2018

Success Quotes : Famous Success Quotes And Sayings

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Wednesday, 30 May 2018

यारों के नाम ………..

Dosti shayari साथ साथ चलना ज़िन्दगी के कड़वे घूंट पीना हर पल को खुल के जीना याराना वो भी शानदार...

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Monday, 28 May 2018

संगठन | Short Story on Unity

Short Story on Unity

संगठन | Short Story on Unity


भैया ये बात तो साफ है की अगर संघठन में रहकर कोई काम किया जाए तो उस काम के सफल होने की संभावनाए कई गुना बढ़ जाती है| इसी बात से रूबरू कराती है आपको हमारी कहानी “संगठन | Short Story on Unity” जहाँ आप संगठन और संगठन से होने वाले  के बारे में जन सकेंगे| तो लीजिये पेश है आज की हमारी कहानी……..

                              संगठन | Short Story on Unity

बात सालों पुरानी है…. मथुरा के पास एक गाँव था| उस गाँव में एक लकडहारा रहता था| लकडहारा रूज सुबह सुबह जंगल में लकड़ियाँ लेने जाता और शाम को गाँव में आकर बेच देता| एक बार जब लकडहारा सुबह सुबह जंगल की और गया तो उसे जंगल में एक गड्ढे में जंगली श्वान के बच्चे को गिरा हुआ देखा| लकडहारे ने श्वान को गड्ढे से निकला और उसका उपचार करने के लिए अपने साथ अपने घर ले आया| कुछ ही समय में श्वान का बच्चा लकडहारे के परिवार से बहुत अच्छे से घुल-मिल गया|

जब श्वान का बच्चा बड़ा हुआ तो लकडहारे ने सोचा  की “श्वान के लिए जंगल का खुला वातावरण ही अच्छा रहेगा इसलिए अब इसे जंगल में छोड़ देन चाहिए” | बस लकडहारे के सोचने भर की देर थी, अगले दिन ही लकडहारा श्वान को जंगल में छोड़ आया| श्वान जल्दी ही जंगल में दुसरे श्वानों के साथ घुलमिल गया और उनका मित्र बन गया|

कुछ दिन बाद ही लकडहारे को पता चला की जंगल में एक बाघ है जो प्रायः श्वानों का शिकार कर उन्हें खा जाता है| अब लकडहारे को अपने पाले हुए श्वान की चिंता सताने लगी| लकडहारे ने कुछ सोचविचार कर अपने श्वान को बचने के लिएय बाघ का शिकार करने का निश्चय किया| अगले दिन ही लकडहारे ने बाघ को मारने की एक योजना बनाई| उसने जंगल के बिच में एक बड़ा सा गड्ढा खोदा और सभी श्वानों को गड्ढे के पीछे खड़ा कर खुद गड्ढे के आगे खड़ा हो गया|

कुछ ही समय में बाघ श्वानो का शिकार करने श्वानों के रहने वाले इलाके की और आया| बाघ ने श्वानों को डराने के लिए उन्हें घूरकर देखा और एक लम्बी दहाड़ लगाई| श्वानों के साथ लकडहारा खड़ा था इसलिए बाघ की दहाड़ सुनकर श्वान डरे नहीं और अपनी जगह पर जैसे के तैसे खड़े रहे| तभी बाघ की नज़र लकडहारे पर पड़ी| बाघ लकडहारे को मारने के लिए जैसे ही लकडहारे की औरे झपटा, लकडहारा एक और कूद गया और बाघ सीधे लकडहारे के खोदे गए गड्ढे में जा गिरा|

बस फिर क्या था, मौका देखकर सभी श्वान बाघ पर टूट पड़े और कुछ ही देर में  शेर को मार गिरा दिया| और इस तरह जंगल के श्वान संघठन से शेर जैसे जानवर पर विजय पाने में सफल हुए|

संगठन | Short Story on Unity


पढ़ें मेहनत से पहाड़ खोदने वाले किसान की कहानी!

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Friendship Quotes : Friendship Day Quotes – Quotes On Friendship Day

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Sunday, 27 May 2018

परिश्रम का महत्व | Story in Hindi Language

Story in Hindi Language

परिश्रम का महत्व | Story in Hindi Language


अपनी मात्रभाषा में कहानी पढने का कुछ मज़ा ही अलग है| इसीलिए हम हमारे पाठकों के लिए हमारी वेबसाइट hindishortstories.com में हिंदी में नई-नई कहानियां लेकर आते हैं| इसी कड़ी में पेश है हमारी एक और नई कहानी “परिश्रम का महत्व | Story in Hindi Language”

              परिश्रम का महत्व | Story in Hindi Language

बात तब की है जब बीमारियाँ एक पहाड़ पर रहा करती थी| पहाड़ बिमारियों को अपनी बेटी की तरह पालता पोसता था| बीमारियाँ पहाड़ के इस उपकार के लिए पहाड़ का अहसान मानती और हमेशा पहाड़ के इस अहसान के लिए किसी भी उपकार के लिए इच्छुक रहती| लेकिन पहाड़ तो पहाड़ ठहरा, था ही इतना विशाल और अपनी जगह डटा हुआ की उसे कभी बिमारियों के किसी उपकार की ज़रूरत ही नहीं पड़ी|

पहाड़ की तलहटी में ही एक गाँव था| कुछ दिन बीते और गाँव के एक किसान को खेती के लिए अतिरिक्त ज़मीन कि ज़रूरत पड़ी| किसान को कहीं ज़मीन दिखाई नहीं दी| अचानक किसान की नज़र हजारों एकड़ जमीन दबाए हुए पहाड़ पर पड़ी| किसान ने सोचा क्यों ना पहाड़ को खोदकर खेती योग्य जमीन को निकाल दिया जाए| ]

बस फिर क्या था, किसान के सोचने भर की देर थी और उसने पहाड़ को खोदकर कई साडी जमीन निकाल ली| किसान को पहाड़ खोदता देख और दुसरे किसान भी जमीन के लिए पहाड़ को खोदने चले आए| देखते ही देखते किसानों की संख्या सेकड़ों तक पहुँच गई| किसान फावड़ा लेकर पहाड़ को खोदने में जुटे रहे|

परिश्रम का महत्व | Story in Hindi Language

यह देख पहाड़ को अपना अस्तित्व खतरे में नज़र आने लगा| पहाड़ घबराया और अपने बचाव के उपाय खोजने लगा| किसान को जब अपने बचाव का कोई उपाय न सुझा तो उसे अपने कोटर में पल रही बिमारियों की याद आई| पहाड़ ने सभी बिमारियों को इकठ्ठा किया और कहा, “मेने कई साल तुम्हारी रक्षा की है और तुम्हें रहने के लिए अपनी कोटर में स्थान दिया है| लेकिन अब मेरे किए गए इस उपकार का वक्त आ गया है|” बीमारियाँ पहाड़ के किसी भी काम के लिए पहले ही तैयार थी| किसान ने फावड़े और कुदाल चलाते हुए किसानो की और इशारा किया और कहा, “पुत्रियों! यह देखो मेरे क्षत्रु| फावड़ा और कुदाल लेकर मेरे अस्तित्व को खतरे में डाले हुए हैं| तुम सब की सब इनपर झपट पदों और मेरा नाश करने वालों का सत्यानाश कर डालो|”

पहाड़ का आदेश मानकर बीमारियाँ आगे बढ़ी और किसानों के शरीर से जाकर लिपट गई| पर किसान तो अपनी धुन में लगे थे| जितने तेजी से फावड़े और कुदाल चलाते उतनी ही तेजी से पसीना बाहर निकलता और साड़ी बीमारियाँ धुलकर निचे गिर जाती| बिमारियों ने किसानों को बीमार बनाने के लिए बहुत प्रयत्न किये लेकिन बिमारियों की एक ना चली| एक अच्छा स्थान छोड़कर उन्हें गंदे स्थान पर जाना पड़ा सो अलग|

पहाड़ ने देखा की जिन बिमारियों को उसने सालों से पाला था वह भी उसकी रक्षा न कर सकी तो पहाड़ बहुत क्रोधित हुआ और उसने बिमारियों को श्राप दिया, कि “मेने तुम्हें अपनी पुत्रियों कि तरह पाला पर फिर भी तुम मेरी रक्षा नहीं कर सकी अब तुम जहाँ हो वहीँ पड़ी रहो|”

तब से बीमारियाँ गन्दगी में ही पड़ी रहती है और महनत करने वाला अनपढ़ आदमी भी स्वस्थ जीवन जीता है| बस यही नियम आज तक चला आ रहा है|

इसीलिए कहा गया है, “हमेशा महनत करते रहना चाहिए| महनती व्यक्ति हमेशा स्वस्थ व् सफल जीवन जीता है|”


पढ़ें :- बूढी माँ के पंच रत्नों की कहानी !

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